स्वास्थ्य और आदर्श की बात (परिचय)

स्वस्थ होना और आनंदमय में होना दोनों में क्या फर्क है। 


स्वास्थ्य और आदर्श की बात (परिचय)


आदर्श की बात और स्वास्थ्य 
Health and aadarsh ki baat 



मैंने अक्सर शरीर से स्वस्थ दिखने वाले लोगो को अंदर से दुखी पाया है और दवाये या नशे के बिना जीवन न गुजारते पाया है। और ऐसे भी लोगो से अक्सर मिलना हो  जाता है जो बड़ी उम्र में जाने के बावजूद भी खुश आनंदमय और स्वस्थ है।   


क्या बीमारी न होने को स्वस्थ कह सकते है ? 

स्वास्थ्य होने का असली में क्या मतलब माना जा सकता है  ?  

जो मेरा मानना है वो ही मै यंहा लिखना चाहूंगा। ऐसा सबका मानना हो ये जरुरी नहीं है। पर मेरा मानना है की स्वास्थ एक अवस्था है जिसको सिर्फ ध्यान के द्वारा पाया जा सकता है या ध्यान के द्वारा ही गँवाया जा सकता है। दुर्घटना एक अपवाद है। 

  • क्या आप खुद को स्वस्थ महसूस करते है? 
  • आप कितनी देर शांत बैठ सकते है? 
  • काम, धन और यश के अलावा कुछ और सोचने के लिए कितना समय दे पाते है आप खुद को।  

खुद को हमेशा किसी न किसी चीज़ में उलझाए रखना, मोबाइल , न्यूज़ पेपर , संगीत या वीडियो या बातचीत करना और कुछ भी न हो तो व्यर्थ के विचारो में खोए रहना या तो बीती यादो में और या तो भविष्य की चिंता में। 

कितनी देर आप शांत रहकर बैठ सकते है। अगर आप खुद को ध्यान देना शुरू करे तो आप पाएंगे की आप शांत नहीं बैठ सकेंगे कोशिश करके देखिएगा।  

आप बिना किसी काम के नहीं रह सकते आप खुदको किसी न किसी विचार या वास्तु से जोड़े रखना चाहते है। आप नहीं जानते की आप सोते समय भी शांत अवस्था तक नहीं पोहचते बस थोड़ी देर के लिए शरीर कि थकान थोड़ी देर को मिट जाती है पर मानसिक तनाव कम नहीं होता। मतलब ध्यान शांत क्यों नहीं हो पाता है?   

आपको डॉक्टर के पास जाने की जरुरत नहीं पड़ती आप कोई दवाई भी नहीं खाते या किसी तरह का इलाज भी नहीं करवा रहे है पर मेरी नज़र में आप स्वस्थ नहीं है। क्योकि आप आनंद में नहीं है आपको खुश रहने के लिए या खुश होने के लिए या कहे खुदसे दूर रहने के लिए कुछ न कुछ चाहिए। बस आप खुद की शांत अवस्था से इतने डरे हुए है की आप किसी न किसी विचार या वस्तु  से खुदको जोड़े रखते है। 

अब अगर हम बात करे स्वास्थ होने के मतलब की तो स्वयं में स्थ्तित होने की अवस्था ही "स्वास्थ" है। 

इसका मतलब ये है की आप उस अवस्था में है जंहा आपका ध्यान आपकी मर्ज़ी से आपके इशारे पे चलता है और आप जब चाहे खुद को हर विचार और हर विषय से अलग रख सकते है बस ये अवस्था स्वास्थ्य की अवस्था है। 

आप स्वस्थ रहने पे ध्यान देते है तो सबसे पहले आपको स्वास्थ क्या है इसको समझने पे ध्यान देना होगा। इस शब्द से लोगो को क्या बताने की कोशिश की गई? इस शब्द से इंसान को उस अवस्था की तरफ रहने का इशारा किया गया है जिसके लिए उसको प्रभु ने परमात्मा ने संसार में भेजा।

और इस अवस्था से जुड़े रहने के लिए परमात्मा ने उसको ध्यान की शक्ति दी । पर रोज़ की दिनचर्या और लाइफस्टाइल ने हमसे हमारा ध्यान छीन लिया है और हम खुद को भूलकर विषयो और विकारो में खो गए है ऐसा बचपन से ही शुरू हो जाता है। 

जैसे की मैंने लिखा की ध्यान ही हमारी सबसे बड़ी ऐसी उपलब्धि है जिसे इस्तेमाल करके हम अपने किसी भी सपने को पूरा कर सकते है ऐसा धर्म और मनोविज्ञान दोनों ने स्वीकार किया है। स्वस्थ दिखना और स्वास्थ को उपलब्ध होना इस बात को समझने की आवश्यकता है। 

जैसे जैसे आप इसको समझने लगेंगे आप को स्वस्थ दिखने और स्वस्थ होने का फर्क पता चलने लगेगा और आपकी यही अवस्था आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है जो आप खुदको दे सकते हैऔर जीवन के असली आनंद में रहकर जीवन गुजार सकने का सौभाग्य प्राप्त कर सकते है।   

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